Wednesday, 13 May 2009

आज फ़िर याद आ रही है ....... रह रह कर मेरी गुडिया के हाथ पैर मुझे दिखाई दे रहे है । मैं क्या करु ? की मेरी गुडिया मुझे याद न आए ....... क्या कोई रास्ता है जिससे मैं यह सब कुछ कर सकू ...... शायद नही ..... चोट खाई है तो दर्द भी सहना पडेगा.......... ये चोट ईशवर किसी को न दे...........

Tuesday, 12 May 2009

Gudia.....

मैं कैलाश धामु........ जब भी मुझे चोट लगती थी तो मैं हँसता था...... पर अब नहीं...... अब हँसी नहीं आती। अबकी बार चोट बहुत गहरी और कभी ठीक न होने वाली थी । दिनांक १०-११-२००८ को हमने एक फ़ैसला किया..... मेरी शादी के बाद मैंने और नीतू(मेरी बीवी) ने मम्मी पापा के बातों में छुपी हुई उनकी इच्छा को पहचाना... और एक प्लान किया की हम मम्मी पापा को अपना बच्चा दे देंगे ...... वो हमसे दूर जयपुर में नौकरी करते है। अकेले रहते है । शायद उनका एकेलापन कम हो जाए। हम यहाँ पर घर और खेती सँभालते है । २८-०४-२००९ टाइम ०८:३५ सब कुछ टूट गया..... बचा हुआ बिख गया ..... दोनों गले लग कर बहुत देर तक रोये ...... पता नहीं क्यो सब कुछ ........ आंसुओ के सहारे छोड़ दिया......