Wednesday, 13 May 2009

आज फ़िर याद आ रही है ....... रह रह कर मेरी गुडिया के हाथ पैर मुझे दिखाई दे रहे है । मैं क्या करु ? की मेरी गुडिया मुझे याद न आए ....... क्या कोई रास्ता है जिससे मैं यह सब कुछ कर सकू ...... शायद नही ..... चोट खाई है तो दर्द भी सहना पडेगा.......... ये चोट ईशवर किसी को न दे...........

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