Tuesday, 12 May 2009
Gudia.....
मैं कैलाश धामु........ जब भी मुझे चोट लगती थी तो मैं हँसता था...... पर अब नहीं......
अब हँसी नहीं आती। अबकी बार चोट बहुत गहरी और कभी ठीक न होने वाली थी ।
दिनांक १०-११-२००८ को हमने एक फ़ैसला किया.....
मेरी शादी के बाद मैंने और नीतू(मेरी बीवी) ने मम्मी पापा के बातों में छुपी हुई उनकी इच्छा को पहचाना...
और एक प्लान किया की हम मम्मी पापा को अपना बच्चा दे देंगे ...... वो हमसे दूर जयपुर में नौकरी करते है।
अकेले रहते है । शायद उनका एकेलापन कम हो जाए। हम यहाँ पर घर और खेती सँभालते है ।
२८-०४-२००९ टाइम ०८:३५ सब कुछ टूट गया..... बचा हुआ बिख गया ..... दोनों गले लग कर बहुत देर तक रोये ......
पता नहीं क्यो सब कुछ ........ आंसुओ के सहारे छोड़ दिया......
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